
अंबेडकर नगर
कभी बारिश तो कभी कोहरा और बीच-बीच में निकलने वाली धूप के चलते पिछले कुछ दिनों से मौसम में काफी उतार चढ़ाव हो रहा है। इस बीच ठंड का प्रकोप बदस्तूर जारी है। सूर्य के उत्तरायण होने के बाद दर्शन तो हुए, लेकिन तपिश राहत नहीं दे पाई।
उधर, बर्फीली हवा मुसीबत का सबब बनी हुई है। कड़ाके की ठंड और मकर संक्रांति का अवकाश होने के चलते लोगों ने घर में रहना ही मुनासिब समझा।
मंगलवार दिन की शुरुआत हुई तो एक बार फिर शहर कोहरे की चादर में लिपटा हुआ था। दृश्यता कम होने के चलते वाहन चालकों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। तहसील तिराहे पर लोग ठिठुरते हुए अपने गंतव्य की ओर जाते नजर आए। दिन चढ़ने के साथ शीतलहर ने सितम ढाना शुरू कर दिया जो रात तक बदस्तूर जारी रहा। शहर की तमाम प्रमुख सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम से ही घर के बाहर निकले। बस अड्डा, रेलवे स्टेशन समेत सार्वजनिक स्थलों पर ठंड से बचने के लिए लोग अलाव तापते नजर आए। कई दुकानों के आगे भी अलाव के सहारे व्यापारी दिन काटते दिखे। शाम होते ही शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। दिन का अधिकतम तापमान 19 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सोमवार के मुकाबले दो डिग्री कम रहा। छह से आठ किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चली। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी यही हाल रहेगा।
शीतलहर फायदेमंद, पाला से बचाएं फसल
शीत लहर में गेहूं, चना, अरहर जैसी फसलों को फायदा होता है। आलू, भिंडी, सब्जी मटर, गोभी, बैंगन, मूली, टमाटर, केला व पपीता के लिए नुकसानदेह है। कृषि विज्ञान केंद्र पांती के वैज्ञानिक रामजीत ने बताया की इस मौसम में फसलों को पाला से बचाने के लिए खेत में हल्की सिंचाई करनी चाहिए, जिससे उनमें नमी की कमी न हो। समय-समय पर मेंकोजेब, स्ट्रेप्टोसैकिनिल व फसल में लक्षण के अनुसार दवा का छिड़काव करते रहें। पाला से बचाने के लिए आलू व मटर की फसल के मेड़ों पर पुआल से धुआं करें, संभव हो तो रात के समय प्लास्टिक से ढंक दें। ध्यान रहे पौधों पर ज्यादा वजन न पड़ने पाए। प्रगतिशील किसान राम रामतीरथ वर्मा ने बताया कि गेहूं, सरसों, अरहर, मसूर की अच्छी पैदावार के लिए शीतलहर व कोहरा फायदेमंद है। जब मुंह से भाप निकलने लगे तो समझिए कि सर्दी गेहूं के फसल की द़ृष्टि से अच्छी पड़ रही है।









